Screen Reader Access
Home » About»

एक परिचय

राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के हिन्दी विभाग की स्थापना 1 जुलाई 1961 ई. को हुई थी। इससे पूर्व यह विभाग महाराजा एवं महारानी कॉलेज में संचालित होता था। अपनी स्थापना के समय से ही हिन्दी विभाग को अकादमिक क्षेत्र के शीर्ष विद्वानों का नेतृत्व प्राप्त हुआ। इनमें डॉ. सरनाम सिंह शर्मा, डॉ. माताप्रसाद गुप्त, डॉ. सत्येन्द्र, डॉ. विश्वम्भरनाथ उपाध्याय, डॉ. हीरालाल माहेश्वरी प्रमुख हैं। विगत वर्षों में विभाग में राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर की कई संगोष्ठियाँ एवं कार्यशालाएँ आयोजित की गई। हिन्दी विभाग उपलब्ध अकादमिक संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए अपनी लक्ष्य-प्राप्ति हेतु सतत प्रयत्नशील है। अंतरानुशासनिक शोध हेतु यह विभाग इतिहास, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, जनसंचार एवं पत्रकारिता तथा नाट्य विभागों के साथ सक्रिय है।

दादू अध्ययन प्रकोष्ठ

राजस्थान में उपलब्ध पाण्डुलिपियों के विपुल भण्डार के अकादमिक उपयोग तथा मध्यकालीन साहित्य के अध्ययन एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विभाग में ‘दादू अध्ययन प्रकोष्ठ’ की वर्ष 2012 में स्थापना हुई। इस प्रकोष्ठ के अन्तर्गत दादूपंथी साहित्य और संत परम्परा पर शोध कार्य करने हेतु शोधार्थियों को प्रोत्साहित किया जाता है तथा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाता है।

वैष्णव साहित्य अध्ययन केन्द्र

राजस्थान मध्यकालीन सगुण भक्ति का केन्द्र रहा है। राजस्थान में विभिन्न भक्ति संप्रदायों की पीठ स्थापित हैं तथा प्रचुर मात्रा में पांडुलिपियाँ उपलब्ध हैं। इस विपुल साहित्य और भक्ति परम्परा पर शोध अध्ययन हेतु वर्ष 2016 से विभाग में ‘वैष्णव साहित्य अध्ययन केन्द्र’ की स्थापना की गई। शोध छात्रों को फेलोशिप एवं प्रतिवर्ष राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी इस केन्द्र के तत्त्वावधान में किया जाता है।
  • हिन्दी विभाग में सत्र पर्यन्त शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियाँ सुचारू रूप से आयोजित होती हैं।
  • विभाग के संकाय सदस्यों की विगत वर्षों में अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुईं तथा देश की प्रतिष्ठित अकादमिक संस्थाओं से पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हुए। संकाय सदस्यों ने राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता की।
  • विशेष-व्याख्यान शृंखला के अन्तर्गत समय-समय पर विद्वान विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित किये जाते है।
  • बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा विभाग के एक-एक सर्वोच्च अंक प्राप्त छात्र व छात्रा को क्रमशः 11 हजार व 7 हजार रु. का चेक पुरस्कार स्वरूप प्रतिवर्ष दिया जाता है।
  • यूजीसी मानव संसाधन विकास केन्द्र के संयुक्त तत्त्वावधान में विभाग विभिन्न महत्त्वपूर्ण विषयों पर दस पुनश्चर्या पाठ्यक्रम आयोजित कर चुका है।
  • आधारभूत सुविधाएँ एवं संचालित पाठ्यक्रम

  • विभाग मंे विद्यार्थियों के अध्ययन-अध्यापन हेतु सभी मूलभूत सुविधाए उपलब्ध हैं। शोधार्थियों के लिए विभाग में पुस्तकालय एवं संगोष्ठी कक्ष उपलब्ध है।
  • विभाग में लगभग 600 से अधिक शोधार्थियों को पीएच.डीकी उपाधि प्रदान की जा चुकी है।
  • पीएच.डी. प्रोग्राम: विशिष्ट शोध क्षेत्र

  • आदिकालीन साहित्य
  • संत साहित्य
  • ैष्णव भक्ति साहित्य
  • रीतिकालीन साहित्य
  • स्वाधीनता आंदोलन और हिन्दी नवजागरण
  • नए विमर्श-स्त्री, दलित और आदिवासी विमश
  • कथा साहित्य एवं अन्य गद्य विधाए
  • लोक साहित्य, राजस्थानी भाषा एवं साहित्य
  • पाठालोचन
  • तुलनात्मक अध्ययन - बोलिया, भाषा एवं साहित्य
  • हिन्दी पत्रकारिता एवं सिनेमा
  • पी.एच.डी कोर्स वर्क: अवधि - 6 माह
    एम.ए. प्रोग्राम: सीटें- 120, अवधि 4 सेमेस्टर- 2 सेक्शन